हर्बिनजर टुडे / ऋषिकेश डेस्क । परगना परवादून (तहसील ऋषिकेश) के अंतर्गत आने वाले रामनगर डांडा के चर्चित जमीन विवाद में एक नया और चौंकाने वाला मोड़ आ गया है। मामले के मुख्य पीड़ित संजीव गुप्ता ने आज उत्तरांचल प्रेस क्लब में एक पत्रकार वार्ता (Press Conference) का आयोजन कर विरोधियों की साजिशों का पर्दाफाश किया और अपनी व्यथा साझा की।
संजीव गुप्ता ने आरोप लगाया कि कुछ लोग खुद को ‘गरीब और दिव्यांग किसान’ के रूप में पेश कर स्थानीय मीडिया, पुलिस और प्रशासन को लगातार गुमराह कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि एक सुनियोजित साजिश के तहत उनकी छवि को धूमिल करने और उन्हें ‘भूमाफिया’ साबित करने का दुर्भावनापूर्ण प्रयास किया गया है।
सरकारी रिकॉर्ड में संजीव गुप्ता के पक्ष में फैसला
पत्रकारों से बातचीत के दौरान संजीव गुप्ता ने मामले से जुड़े आधिकारिक राजस्व रिकॉर्ड और घटनास्थल के पुख्ता साक्ष्य पेश किए। उन्होंने बताया कि सरकारी दस्तावेजों और राजस्व विभाग (Revenue Department) की जांच में विरोधियों के तमाम दावे पूरी तरह से बेबुनियाद और तथ्यहीन पाए गए हैं। सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, विवादित भूमि पूरी तरह से संजीव गुप्ता के नाम पर पंजीकृत (Registered) है और इस पर उनका वैध मालिकाना हक है।
विरोधियों पर गंभीर मामलों में केस दर्ज
संजीव गुप्ता ने सनसनीखेज खुलासा करते हुए बताया कि उन पर आरोप लगाने वाला पक्ष खुद आदतन कानून तोड़ने वाला है। इन लोगों पर जमीन पर अवैध कब्जा करने, पर्यावरण को नुकसान पहुंचाते हुए हरे पेड़ काटने और सुरक्षा पुश्ता तोड़ने जैसे गंभीर मामलों के आरोप हैं, जिनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई भी चल रही है।
उन्होंने नामजद करते हुए बताया कि सच सामने आने और मुकदमे दर्ज होने के बावजूद आरोपी राकेश बडोनी, लक्ष्मण, अमित बडोनी, शिवम बडोनी, नागेंद्र नेगी और चंद्र किशोर बडोनी अपनी हरकतों से बाज नहीं आ रहे हैं।
‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ की स्थिति
संजीव गुप्ता ने कहा, “अपनी कमियों और अवैध कारनामों को छुपाने के लिए ये आरोपी अब वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) और आईजी गढ़वाल जैसे उच्चाधिकारियों को झूठे और भ्रामक शिकायती पत्र भेज रहे हैं। इस पूरे मामले में ‘उल्टा चोर कोतवाल को डांटे’ वाली कहावत पूरी तरह चरितार्थ हो रही है।
पीड़ित संजीव गुप्ता ने बताया कि इस झूठे दुष्प्रचार के कारण वे पिछले काफी समय से मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न का शिकार हो रहे हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री, जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों से इस मामले में हस्तक्षेप कर न्याय की मांग की है, साथ ही भ्रामक आरोप लगाने वाले दोषियों के खिलाफ सख्त से सख्त कानूनी कार्रवाई करने की अपील की है।
